आक्सफोर्ड, एएनआइ : हमारे स्वास्थ्य का सीधा संबंध हमारे भोजन से होता है। यही वजह है कि स्वस्थ रहने के लिए अच्छे खान-पान की सलाह दी जाती है। हम जानते हैं कि ब्रोकोली, प्याज, गोभी, फूलगोभी जैसी सब्जियां और संतरे, केले, सेब और नींबू जैसे फल कैंसर से लड़ने में मदद करते हैं, लेकिन मांसाहार के बारे में क्या? क्या मांसाहार खाने से कैंसर का खतरा बढ़ता है या इसे खाने से कैंसर से लड़ने में मदद मिलती है? एक नवीन अध्ययन में इन ¨बदुओं पर प्रकाश डाला गया है। इस अध्ययन में बताया गया है कि मांस का कम सेवन या मांस रहित भोजन कैंसर के खतरे को कम करने में मदद करता है।

बीएमसी मेडिसिन नामक जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में बताया गया है कि सप्ताह में पांच या उससे कम बार मांस के सेवन का संबंध कैंसर के कम जोखिम से होता है। दूसरे शब्दों में कम मांस खाना ही कैंसर के खतरे को कम कर सकता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन्होंने हर सप्ताह पांच बार से अधिक मांस का सेवन किया था उनकी तुलना में प्रति सप्ताह पांच बार या उससे कम मांस खाने वालों में कैंसर का खतरा दो प्रतिशत कम था। वहीं, जिन्होंने मांस नहीं, बल्कि मछली का सेवन किया उनमें इसका खतरा 10 प्रतिशत कम और पूर्णरूप से शाकाहारी लोगों में कैंसर का खतरा 14 प्रतिशत कम था।

किस तरह का खतरा?

शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन में यह भी पता लगाने का प्रयास किया कि हमारे आहार से किस तरह के कैंसर का खतरा होता है। अध्ययन में पाया गया कि सप्ताह में पांच बार से अधिक मांस का सेवन करने वालों की तुलना में पांच बार या उससे कम मांस खाने वालों में कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा नौ प्रतिशत कम था। वहीं, मछली खाने वाले, लेकिन मांस नहीं खाने वालों में प्रोस्टेट कैंसर का खतरा 20 प्रतिशत कम और शाकाहारियों में 31 प्रतिशत कम था। वहीं, पांच बार से अधिक मांस खाने वाली महिलाओं की तुलना में शाकाहारी महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा 18 प्रतिशत कम था।

और अध्ययन की जरूरत

इस अध्ययन के साथ शोधकर्ताओं ने यह भी कहा है कि चूंकि यह प्रतिभागियों के कुछ समय तक के आहार के डाटा पर किया गया अध्ययन है, इसलिए इसे आखिरी परिणाम नहीं माना जा सकता, क्योंकि इसमें उनके पूरे जीवनकाल का आहार शामिल नहीं है। यही वजह है कि शोधकर्ताओं ने इस दिशा में और अध्ययन की जरूरत बताई है और कहा है कि वे भविष्य में और बड़ी जनसंख्या पर लंबे समय तक उनके आहार पर अध्ययन करेंगे, ताकि इस पर और स्पष्टता आ सके।

क्या कहते हैं आंकड़े?

अध्ययन में प्रतिभागियों की डायबिटीज की स्थिति और जीवनशैली का भी विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि 2,47,571 (52 प्रतिशत) प्रतिभागियों ने प्रति सप्ताह पांच बार से अधिक मांस खाया, 2,05,382 (44 प्रतिशत) प्रतिभागियों ने प्रति सप्ताह पांच या उससे कम बार मांस खाया, 10,696 (दो प्रतिशत) ने मछली खाई, लेकिन मांस नहीं खाया और 8,685 (दो प्रतिशत) शाकाहारी थे।

इस तरह किया गया अध्ययन

कोडी वाटलिंग और यूनिवर्सिटी आफ आक्सफोर्ड में उनके सहयोगियों द्वारा एक अध्ययन किया गया, जिसमें खान-पान और कैंसर के खतरे के बीच संबंध का पता लगाया गया। शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन के लिए 4,72,377 ब्रिटिश वयस्कों के डाटा का प्रयोग किया, जो 2006 से 2010 के बीच यूके बायोबैंक में भर्ती किए गए थे। इनकी आयु 40 से 70 वर्ष के बीच थी। इसमें देखा गया कि इन्होंने मांस का कितना सेवन किया और इस दौरान उनमें कैंसर के खतरे के बारे में पता लगाया गया।

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