-रंजना मिश्र

हाल ही में भारतीय रेल ने ट्रेनों को आपस में टकराने से बचाने के लिए स्वदेशी सुरक्षा तकनीक ‘कवच’ का सफल परीक्षण किया। इसके लिए दो ट्रेनों को आमने-सामने चलाया गया। दोनों ट्रेनें एक-दूसरे से करीब 380 मीटर की दूरी पर रुक गईं। कवच तकनीक की वजह से ट्रेनों में अपने आप ब्रेक लग गए। दरअसल भारतीय रेल में सुरक्षा हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है।

अब कवच तकनीक का प्रयोग कर भारतीय रेल एक नया इतिहास रचने जा रही है। यह तकनीक 160 किलोमीटर प्रति घंटे तक की गति से चल रही ट्रेन को रोक देगी। इसके प्रयोग से देश में आए दिन होने वाले ट्रेन हादसों की रोकथाम होगी, जिससे रेलवे को नुकसान से राहत मिलेगी। साथ ही लोगों की भी जान-माल की रक्षा होगी।

कवच तकनीक को जीरो एक्सीडेंट के लक्ष्य को प्राप्त करने में रेलवे की मदद के लिए विकसित किया गया है। यह उस स्थिति में एक ट्रेन को स्वचालित रूप से रोक देगी, जब उसे निर्धारित दूरी के भीतर उसी लाइन पर दूसरी ट्रेन के होने की जानकारी मिलेगी। रेलवे फाटक आने पर कवच तकनीक खुद सीटी बजाना शुरू कर देगी। इस तकनीक के कारण लोकोपायलट द्वारा लाल सिगनल को नजरंदाज किए जाने पर या टैक एवं सिग्नल में किसी अन्य खराबी आने पर भी ट्रेनें स्वत: रुक जाएंगी, जिससे उनमें टक्कर की आशंका नहीं रहेगी।

स्वदेश में निर्मित यह तकनीक विदेशी सुरक्षा प्रणालियों से बहुत सस्ती है। कवच तकनीक के संचालन का खर्च 50 लाख रुपये प्रति किलोमीटर आएगा, जबकि वैश्विक स्तर पर इस तरह की सुरक्षा प्रणाली का खर्च प्रति किलोमीटर करीब दो करोड़ रुपये है। इसमें उच्च आवृत्ति के रेडियो संचार, माइक्रोप्रोसेसर, ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम का उपयोग किया गया है।

निश्चित ही भारतीय रेल की यह तकनीक बहुत ही लाभकारी सिद्ध होगी, क्योंकि आए दिन होने वाले हादसों की वजह से लोग ट्रेनों में सफर करने से घबराते हैं। इसके प्रयोग से लोगों का डर दूर हो जाएगा और वे निश्चिंत होकर अपना सफर पूरा कर सकेंगे। अभी इसे कुछ ही क्षेत्रों में लगाया गया है, किंतु धीरे-धीरे यह पूरे भारत के रेल मार्गों को कवर करेगी, जिससे देश भर की रेल यात्रा पूरी तरह सुरक्षित हो जाएगी। दक्षिण मध्य रेलवे की जारी परियोजनाओं में अब तक कवच को 1098 किलोमीटर मार्ग पर लगाया गया है।

दिल्ली-मुंबई और दिल्ली हावड़ा रेल मार्ग पर भी इसको लगाने की योजना है, जिसकी लंबाई लगभग 3,000 किलोमीटर है। आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत भी रेल नेटवर्क को कवच तकनीक के तहत लाने की योजना है। देश में इसके प्रयोग के साथ-साथ सरकार की इसे निर्यात करने की भी योजना है। यह तकनीक भारत को आत्मनिर्भर बनाने की ओर भी एक महत्वपूर्ण कदम है।

(लेखिका स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं)

Editor, the Credible Science Pradeep's name is definitely included in the science communicators who have made their mark rapidly in the last 8-9 years. Pradeep is writing regularly in the country's leading newspapers and magazines on various subjects of science.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

One reply on “ट्रेनों को आपस में टकराने से रोकेगा ‘कवच’”

  • March 9, 2022 at 1:40 pm

    बहुत ही उपयोगी तकनीक, इससे निश्चय ही जन, धन हानि को रोका जा सकेगा।