ज दुनिया के किसी भी देश की संपन्नता उसके पास उपलब्ध ऊर्जा के साधनों पर निर्भर करती है। जिस देश के पास ऊर्जा के जितने ज्यादा साधन हैं, वह उतनी ही ज्यादा तेजी से तरक्की कर सकता है। फिलहाल, ऊर्जा उत्पादन के लिए जीवाश्म ईंधनों के अंधाधुंध इस्तेमाल को रोकना और दिनोंदिन बढ़ती ऊर्जा जरूरतों की पूर्ति करना पूरी दुनिया के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती है।

वैज्ञानिक लंबे वक्त से एक ऐसे ईंधन की खोजबीन में हैं, जो पर्यावरण और मानव शरीर को नुकसान पहुंचाए बगैर हमारी ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने में सक्षम हो। वैज्ञानिकों की यह तलाश न्यूक्लियर फ्यूजन (नाभिकीय संलयन) पर खत्म होती दिखाई दे रही है। न्यूक्लियर फ्यूजन ही हमारे सूर्य और अन्य तारों में ऊर्जा का स्रोत है। वैज्ञानिक कई वर्षों से सूर्य के क्रोड (कोर) में संपन्न होने वाले इस नियंत्रित फ्यूजन को धरती पर कराने के लिए प्रयासरत हैं, जिससे ऊर्जा पैदा की जा सके। तकनीकी रूप से यह धरती पर एक ‘नकली सूरज’ (आर्टिफ़िशियल सन) बनाने जैसा है।

हाल ही प्रैक्टिकल न्यूक्लियर फ्यूजन की दिशा में यूरोपीय वैज्ञानिकों को एक बड़ी कामयाबी हासिल हुई है – ऑक्सफ़ोर्डशायर स्थित ज्वाइंट यूरोपियन टोरस (जेईटी) लेबोरेटरी के रिएक्टर ने 59 मेगाजूल ऊर्जा को नाभिकीय संलयन प्रक्रिया द्वारा पैदा किया, जो 60 वॉट के इलेक्ट्रिक बल्ब को 11 दिनों तक जलाए रखने के लिए पर्याप्त है। इस ऊर्जा को उत्पन्न करने के लिए 11 मेगावाट बिजली का इनपुट के रूप में इस्‍तेमाल किया गया। यह एक नया वर्ल्ड रिकॉर्ड है, जो 1997 में जेईटी लैब द्वारा ही बनाए 22 मेगाजूल के रिकॉर्ड को तोड़ता है। जेईटी लैब में स्थापित टोकामक मशीन दुनिया का सबसे बड़ा और शक्तिशाली ऑपरेशनल मशीन है। इस मशीन के अंदर बहुत कम मात्रा में ड्यूटीरियम और ट्रीटीयम भरा गया है। प्रयोग के दौरान इसे सूरज के केंद्र की तुलना में 10 गुना ज्‍यादा तापमान पर गर्म किया जाता है ताकि प्‍लाज्‍मा का निर्माण किया जा सके।

यूके एटॉमिक एनर्जी अथॉरिटी ने 9 फरवरी को इस प्रयोग की औपचारिक घोषणा करते हुए कहा कि:

 

“जेईटी लैब ने पिछले साल के अंत में एक प्रयोग के दौरान 59 मेगाजूल ऊर्जा उत्पन्न करने में कामयाबी मिली। इस तरह इसने अपने स्वयं के 1997 के वर्ल्ड रिकॉर्ड से दोगुना ज्यादा ऊर्जा उत्पन्न की। यह सुरक्षित और टिकाऊ लो-कार्बन एनर्जी प्रदान करने के लिए फ्यूजन एनर्जी की क्षमता का दुनिया भर में सबसे स्पष्ट प्रदर्शन है।”

ब्रिटेन के विज्ञान मंत्री जॉर्ज फ्रीमैन ने इस प्रयोग को मील का पत्थर करार दिया है। फ्रीमैन ने अपने बयान में कहा कि ‘यह इस बात का प्रमाण है कि यूके और यूरोप भर में हमारे भागीदारों के सहयोग से किए जा रहे अभूतपूर्व अनुसंधान और नवाचार, फ्यूजन पावर को एक हकीकत में तब्दील कर रहे हैं।’

विशेषज्ञों का मानना है कि फ्यूजन एनर्जी आने वाले समय में ऊर्जा के प्रचुर, सुरक्षित और हरित स्रोत के रूप में जलवायु परिवर्तन से निपटने में बेहद मददगार साबित होगा। गौरतलब है कि जब दो हल्के एटॉमिक न्यूक्लियस जुड़कर एक भारी तत्व के न्यूक्लियस का निर्माण करते हैं तो इस प्रक्रिया को न्यूक्लियर फ्यूजन कहते हैं। अगर हम हाइड्रोजन के चार न्यूक्लियस को जोड़ें तो हीलियम के एक न्यूक्लियस का निर्माण होता है। हाइड्रोजन के चार न्यूक्लियस की तुलना में हीलियम के एक न्यूक्लियस का द्रव्यमान कुछ कम होता है। इस प्रक्रिया में द्रव्यमान में हुई कमी ही ऊर्जा के रूप में मिलती है। इसके पीछे अल्बर्ट आइंस्टाइन द्वारा प्रतिपादित ‘थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी’ का मशहूर समीकरण E=mc² है। इस समीकरण के मुताबिक द्रव्यमान ऊर्जा का ही एक रूप है, द्रव्यमान m ऊर्जा की एक मात्रा E के बराबर है।

हाइड्रोजन के फ्यूजन द्वारा विशाल मात्रा में ऊर्जा पैदा की जा सकती है, यह बात सबसे पहले 1938 में जर्मन वैज्ञानिक हैन्स बैथे के अनुसंधान कार्यों से पता चली। इसी न्यूक्लियर फ्यूजन के सिद्धांत के आधार पर हाइड्रोजन बम का निर्माण किया गया। इसका मतलब यह है कि सूर्य तथा अन्य तारों में हर रोज हजारों-करोड़ों हाइड्रोजन बम फूटते रहते हैं। लेकिन, तारों के भीतर होने वाली फ्यूजन प्रक्रियाएं विस्फोटात्मक रूप में न होकर संतुलित रूप में होती हैं। जेईटी का यह हालिया प्रयास फ्यूजन को धरती पर संतुलित रूप से ही करवाकर ऊर्जा पैदा करने का है। फ्यूजन से पैदा हुई ऊर्जा सुरक्षित होती है और एक किलो फ्यूजन ईंधन से एक किलो कोयला, तेल या गैस की तुलना में तकरीबन एक करोड़ गुना ज्यादा ऊर्जा पैदा की जा सकती है। बहरहाल, हम यह निश्चित रूप से कह सकते हैं कि न्यूक्लियर फ्यूजन कार्यक्रम निकट भविष्य में ऊर्जा संकट को दूर करने, जलवायु परिवर्तन से निपटने में और वैश्विक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।

Editor, the Credible Science Pradeep's name is definitely included in the science communicators who have made their mark rapidly in the last 8-9 years. Pradeep is writing regularly in the country's leading newspapers and magazines on various subjects of science.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

One reply on “फ्यूजन एनर्जी में निहित है ऊर्जा क्षेत्र का भविष्य”

  • Faizan Ali
    March 18, 2022 at 5:00 am

    नाभिकीय फ्यूज़न को अगर संतुलित रूप में मनुष्य करा सके तो सूरज तो हमारी मुट्ठी में होगा लेकिन
    नाभिकीय विखंडन से भी भारी ऊर्जा की यह मुट्ठी विध्वंसक रूप में खुली तो मानव जाति का विनाश बहुत संभव है